मेरे हिय सरवर मही, खिल्यौ कृष्णमुख कंज।
यही ध्यान उर आनिये, अद्भुत सुख कौ पुंज॥
- ब्रज के दोहे
मेरे हृदय रूपी सरोवर में श्रीकृष्ण का मुख रूपी कमल खिल उठा है। अब वही मुख-कमल मेरे ध्यान में प्रकट होता है, जो अद्भुत सुख का पुंज है।
- ब्रज के दोहे
मेरे हृदय रूपी सरोवर में श्रीकृष्ण का मुख रूपी कमल खिल उठा है। अब वही मुख-कमल मेरे ध्यान में प्रकट होता है, जो अद्भुत सुख का पुंज है।

