राधे तुमको मेरी लाज - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (29)

राधे तुमको मेरी लाज - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (29)

(राग कामोद त्रिताल)
राधे तुमको मेरी लाज।
तुम बिन मेरा कोइ न जग में, करुणामयी सिरताज॥ [1]
तेरो नाम रटौं निशिवासर, तेरो ही अब नाज।
जीवन प्राणधन नवल श्याम की, बल इक तेरो आज॥ [2]
वृन्दावन की रानी राधे, तेरो इक सत राज।
श्रीगोपाल हित हरि लाडिली, सदा गरीब निवाज॥ [3]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (29)

हे श्री राधे, मेरी लाज आपके हाथ है। हे ब्रज की चूड़ामणि, हे करुणामयी, आपके बिना संसार में मेरा और कोई नहीं है। [1]

आपका ही नाम मैं रात-दिन रटता हूँ एवं मेरा ह्रदय अब आपके गर्व से भरा रहता है । हे नवल किशोर श्री श्यामसुंदर की जीवन प्राणधन, मुझे केवल आपका ही बल है। [2]

श्री हित गोपालदास कि "हे वृन्दावन की महारानी श्री राधा, आपका ही एकछत्र राज है। हे श्री हरि की लाड़िली, आप सदैव दीनों की रक्षा करने वाली हो।" [3]