(सवैया)
मन्त्र सिरोमनि राधा नाम।
पढ़ि पावै वृन्दावन धाम॥ [1]
वशीकरण या सम नहिं कोई।
कमल नैन जाके वस होई॥ [2]
उच्चाटन की शक्ति अनेक।
कर्म धर्म मेटे अविवेक॥ [3]
श्रीहरिवंश चरण आराधौं।
मोहनदास मन्त्र यह साधौं॥ [4]
- श्री मोहनचन्द्र जी
समस्त मंत्रों का शिरोमणि श्री राधा नाम है, जिसके उच्चारण से श्री वृंदावन धाम के वास की प्राप्ति होती है। [1]
श्री राधा नाम के समान वशीकरण मंत्र और कोई नहीं है, जिसके जपने से कमलनयन श्रीकृष्ण वश में हो जाते हैं। [2]
श्री राधा नाम मंत्र में अनेक उच्चाटन की शक्तियाँ हैं, जो समस्त कर्म-धर्म एवं अविवेक का नाश कर देती हैं। [3]
श्री मोहनचंद्र जी कहते हैं — “श्री हरिवंश महाप्रभु के चरणों की आराधना करो एवं श्री राधा नाम मंत्र की साधना करो।” [4]
मन्त्र सिरोमनि राधा नाम।
पढ़ि पावै वृन्दावन धाम॥ [1]
वशीकरण या सम नहिं कोई।
कमल नैन जाके वस होई॥ [2]
उच्चाटन की शक्ति अनेक।
कर्म धर्म मेटे अविवेक॥ [3]
श्रीहरिवंश चरण आराधौं।
मोहनदास मन्त्र यह साधौं॥ [4]
- श्री मोहनचन्द्र जी
समस्त मंत्रों का शिरोमणि श्री राधा नाम है, जिसके उच्चारण से श्री वृंदावन धाम के वास की प्राप्ति होती है। [1]
श्री राधा नाम के समान वशीकरण मंत्र और कोई नहीं है, जिसके जपने से कमलनयन श्रीकृष्ण वश में हो जाते हैं। [2]
श्री राधा नाम मंत्र में अनेक उच्चाटन की शक्तियाँ हैं, जो समस्त कर्म-धर्म एवं अविवेक का नाश कर देती हैं। [3]
श्री मोहनचंद्र जी कहते हैं — “श्री हरिवंश महाप्रभु के चरणों की आराधना करो एवं श्री राधा नाम मंत्र की साधना करो।” [4]

