राधिका छबीली प्रानप्यारी वृषभानुसुता - श्री वृंदावन दास चाचा जी

राधिका छबीली प्रानप्यारी वृषभानुसुता - श्री वृंदावन दास चाचा जी

(कवित्त)
राधिका छबीली प्रानप्यारी वृषभानुसुता,
लाड़िली नवेली अलबेली ठकुरानी जू। [1]
लाल बल्लभा जू श्यामा भामा वामा अभिरामा,
सुख धामा सुकुमारी रिझवार जग जानी जू॥ [2]
लड़ैती किशोरी गोरी गरवीली चतुर प्रिया,
रँगीली रसीली राधे पिय-मन मानी जू। [3]
जील कण्ठ वारी अरु नीले पट वारी,
सुखरासि दैन वारी बलि 'वृन्दावन रानी' जू॥ [4]

- श्री वृंदावन दास चाचा जी

श्री प्रिया जी की नामावली -

राधिका - श्री कृष्ण की आराध्या,
छबीली - अनुपम छवि को धारण करने वाली,
प्रानप्यारी - श्री कृष्ण को अपने प्राणों से अधिक प्यारी,
वृषभानुसुता - वृषभानु जी की पुत्री,
लाड़िली - श्री कृष्ण एवं समस्त परिकर के लिए लाड़ की भाजन एवं अत्यन्त दुलारी,
नवेली - नित्य नवीन रूप माधुर्य धारण करने वाली,
अलबेली - सुन्दर छवि से श्री कृष्ण एवं समस्त परिकर को आकर्षित करनेवाली,
ठकुरानी - सर्वोपरि महारानी। [1]

लाल वल्लभा - श्री कृष्ण की प्रियतमा,
श्यामा - षोडश वर्षीया नव-नव रूप, गुण, सौन्दर्य, लावण्य-निधि, रसनिधि नागरी,
भामा - प्रियतम-प्रेम की प्रकाशिका,
बामा - प्रतिकूलता की रस-विधा में भी रसास्वादन करने-कराने वाली प्रिया,
अभिरामा - आनंद निधि, श्री कृष्ण के मन को हरण करनेवाली,
सुख धामा - सुख की धाम,
सुकुमारी - अत्यंत सुकोमल अंगों वाली
रिझवार जगजानी जू - जगत जानता है कि वे जल्दी रीझने वाली हैं । [2]

लड़ैती - लाड़िली, प्यारी, लाड़ की भाजन,
किशोरी - नित्य कैशोरावस्था सम्पन्न,
गोरी - गौर वर्ण वाली,
गरवीली - श्री कृष्ण प्रेम के गर्व से शोभित,
चतुर - मूर्तिमान चातुरी को भी अपनी चातुरी से पराजित करने वाली,
प्रिया - श्री कृष्ण की प्रेमिका,
रँगीली - आनन्द में लीन, रसिकनी, प्रेम-रंग में रँगी हुई
रसीली - रस युक्त अथवा रस प्रदात्री,
राधे - श्री कृष्ण की आराध्या,
पिय-मन मानी - प्रियतम से अपनी बात को मनवाने वाली। [3]

जील कण्ठ वारी - कोमल स्वर वाली,
नीले पट वारी - नीलाम्बर धारण करने वाली,
सुखरासि दैन वारी - सुख की राशि प्रदान करने वाली,
वृन्दावन महारानी - वृंदावन की महारानी 
ऐसी श्री राधा की मैं बलिहारी जाता हूँ। [4]