सर्वोपरी राधा कुंवरी, प्रिय प्राणन के प्राण।
ललितादिक सेवत तिनहिं, अति प्रवीन रस जान॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, बृहद वामन पुराण की भाषा (23)
सर्वोपरि श्री राधा महारानी हैं, जो स्वयं श्रीकृष्ण के प्राणों की भी प्राण हैं। ललिता और अन्य सखियाँ उनकी ही सेवा में लीन रहती हैं, क्योंकि वे जानती हैं कि श्री राधा परम प्रवीण और सर्वोच्च रस की मूल स्रोत हैं।
ललितादिक सेवत तिनहिं, अति प्रवीन रस जान॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, बृहद वामन पुराण की भाषा (23)
सर्वोपरि श्री राधा महारानी हैं, जो स्वयं श्रीकृष्ण के प्राणों की भी प्राण हैं। ललिता और अन्य सखियाँ उनकी ही सेवा में लीन रहती हैं, क्योंकि वे जानती हैं कि श्री राधा परम प्रवीण और सर्वोच्च रस की मूल स्रोत हैं।

