गहैं चरन कल ललन लुभावैं।
सहज अरुन मेहंदी रँग राते, जावक चित्र बनावैं॥ [1]
चूंबि चूंबि छ्वावति नैननि कों, हियें लियें रहि जावैं।
हँसि हँसि खैंचत पग अलबेली, अलि लम्पट संग धावैं॥ [2]
- श्री अलबेली अलि, समय प्रबन्ध (108)
श्री राधा के चरण कमलों के स्पर्श का सुख प्राप्त करने के लिए श्रीकृष्ण सदा व्याकुल रहते हैं। श्री राधा के चरण कमल अरुणिम आभा से युक्त हैं और मेहँदी के रंग से अनुरंजित हैं, जिसमें श्री कृष्ण जावक लगते हैं और चित्र बनाते हैं। [1]
श्री कृष्ण उन चरण कमलों को बार-बार चूमते हैं, अपने नेत्रों से उनका स्पर्श कराते हैं एवं अपने ह्रदय से सदा लगाए रहते हैं। श्री अलबेली अलि कहते हैं कि "जब श्री कृष्ण उन चरणों से चिपके होते हैं, और श्री राधा हँस-हँस कर अपने चरणों को खींचती हैं, तो लंपट लालजी उन श्री चरणों के संग पीछे पीछे भागने लगते हैं।" [2]

