सब तजि जुगल-किसोर भजि, जौ चाहत विश्राम।
'हित ध्रुव' मन बच हेत सौं, सेवहु स्यामा-स्याम॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, बृहद वामन पुराण की भाषा (76)
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, बृहद वामन पुराण की भाषा (76)
श्री हित ध्रुवदास जी कहते हैं कि यदि आप परम शांति की कामना रखते हैं, तो सभी सांसारिक आसक्तियों का त्याग करके श्री श्यामा-श्याम का भजन करें। मन-वचन से प्रेमपूर्वक युगल किशोर की सेवा में निरंतर लगे रहें।

