सखियन रचि रचि सेज बनाई - श्री विट्ठल दास

सखियन रचि रचि सेज बनाई - श्री विट्ठल दास

सखियन रचि रचि सेज बनाई।
रंग महल में परि गये परदा, धरी अंगीठी सुखदाई॥ [1]
सीत समैं ग्रीष्म ऋतु कीनी, अति सुन्दर वर राई।
श्री 'विट्ठल' गिरधारी कृपा निधि, दोऊ पौढ़े ओढ़ि रजाई॥ [2]
- श्री विट्ठल दास

सखियों ने बड़ी सुंदरता से सेज की रचना की है। रंग महल में पर्दा लगा दिया गया है एवं भीतर अंगीठी रख दी है जिससे कक्ष सुखमय हो गया है। [1]

सखियों ने सर्दी के समय में ग्रीष्म ऋतु बना दिया है, जिससे सुखद और आरामदायक वातावरण बन गया है ।श्री विट्ठलदास जी कहते हैं कि "गिरधारी श्री कृष्ण एवं कृपा निधि श्री राधा रजाई ओढ़ कर पौढ़े हैं।" [2]