रसिक रंगे जे जुगल रंग , तिनकी अद्भुत रीत ।
सहज सुरत लागी रहे, गौर श्याम पद प्रीत ॥
- श्री रूप माधुरी, श्री रूप माधुरी जी की वाणी, रसिक पच्चीसी (1)
जो रसिक युगल प्रेम के रंग में रंगे होते हैं उनकी अद्भुत रीति होती है । उनके हृदय में गौर-श्यामल वर्ण वाले श्री राधा-कृष्ण के चरणों के प्रति ऐसा प्रगाढ़ प्रेम होता है कि वे सहज ही समाधि में लीन हो जाते हैं।
सहज सुरत लागी रहे, गौर श्याम पद प्रीत ॥
- श्री रूप माधुरी, श्री रूप माधुरी जी की वाणी, रसिक पच्चीसी (1)
जो रसिक युगल प्रेम के रंग में रंगे होते हैं उनकी अद्भुत रीति होती है । उनके हृदय में गौर-श्यामल वर्ण वाले श्री राधा-कृष्ण के चरणों के प्रति ऐसा प्रगाढ़ प्रेम होता है कि वे सहज ही समाधि में लीन हो जाते हैं।

