(सवैया)
न बच्यौ कोई वेदपुराण पढ़े,
न बच्यौ कोई सीस रखाय जटा। [1]
न बच्यौ कोई जंगलवास किये,
न बच्यौ कोई ऊँची चिनाय अटा॥ [2]
स्वार्थ को परिवार बस्यौ,
ये चार दिना के हैं ठाठ ठटा। [3]
भज ले ‘हरेकृष्ण’ अरी रसने,
तोहि घेरत आवत काल घटा॥ [4]
- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’
ना तो वेदों और पुराणों को पढ़ने वाले बचे, और ना ही शीश पर जटाएँ धारण करने वाले। [1]
ना ही जंगल में वास करने वाले बचे, और ना ही ऊँचे महलों में रहने वाले। [2]
यह स्वार्थ का ही सब संसार है, जिसमें समस्त पारिवारिक जन भी स्वार्थी हैं, और जहाँ केवल चार दिनों का ठाठ है। [3]
श्री हरे कृष्ण जी कहते हैं कि हे रसना! तू भगवान के नाम को भज ले क्योंकि मृत्यु के काले बादल तेरी ओर बढ़ते जा रहे हैं। [4]
न बच्यौ कोई वेदपुराण पढ़े,
न बच्यौ कोई सीस रखाय जटा। [1]
न बच्यौ कोई जंगलवास किये,
न बच्यौ कोई ऊँची चिनाय अटा॥ [2]
स्वार्थ को परिवार बस्यौ,
ये चार दिना के हैं ठाठ ठटा। [3]
भज ले ‘हरेकृष्ण’ अरी रसने,
तोहि घेरत आवत काल घटा॥ [4]
- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’
ना तो वेदों और पुराणों को पढ़ने वाले बचे, और ना ही शीश पर जटाएँ धारण करने वाले। [1]
ना ही जंगल में वास करने वाले बचे, और ना ही ऊँचे महलों में रहने वाले। [2]
यह स्वार्थ का ही सब संसार है, जिसमें समस्त पारिवारिक जन भी स्वार्थी हैं, और जहाँ केवल चार दिनों का ठाठ है। [3]
श्री हरे कृष्ण जी कहते हैं कि हे रसना! तू भगवान के नाम को भज ले क्योंकि मृत्यु के काले बादल तेरी ओर बढ़ते जा रहे हैं। [4]

