करैं मनोरथ पिय के जो कछु उपजै जीय - श्री माधुरी दास,  वृंदावन माधुरी (78)

करैं मनोरथ पिय के जो कछु उपजै जीय - श्री माधुरी दास, वृंदावन माधुरी (78)

करैं मनोरथ पिय के, जो कछु उपजै जीय।
पौढ़ि प्रिया उछंग में, पांय पलोटत पीय॥

- श्री माधुरी दास, वृंदावन माधुरी (78)

प्रियतम श्यामसुन्दर के हृदय की समस्त अभिलाषें को श्री राधा पूर्ण करती हैं । श्री राधिका, श्रीकृष्ण के हृदय (अंक) में सदा विराजती हैं, और श्रीकृष्ण प्रेमपूर्वक उनके चरणों को पलोटते (दबाते) हैं।