स्वप्न तुल्य इस जगत से - डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, श्याम शतक (54)

स्वप्न तुल्य इस जगत से - डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, श्याम शतक (54)

स्वप्न तुल्य इस जगत से, डरना है अज्ञान ।
निर्भय होकर प्रेम से, भजो कृष्ण भगवान ॥

- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, श्याम शतक (54)

स्वप्न तुल्य इस जगत से डरना अज्ञानता है । अत: निर्भय होकर भगवान श्री कृष्णचन्द्र का प्रेम में उन्मत्त होकर भजन करो ।