(कवित्त)
कोऊ कहै मोहि सदां बल है भवानी जू कौ,
कोऊ कहै मोहि सदां बल है भवानी जू कौ,
भाषत अनूप बानी बिमल बिकासनी। [1]
कोऊ कहै मोहि सदां बल मात काली जू कौ,
कारज करत जन खलन बिनासनी॥ [2]
कोऊ कहै मोहि सदां बल रहे गंग जू कौ,
भोजन करत अघ पूजै जन आसनी। [3]
‘लाल बलबीर' कौं भरोसौ रहे येही सदां,
मेरे कुल पुज्ज राधे वृन्दावन बासनी॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद
कोई कहता है कि मुझे सदा माता भवानी का बल प्राप्त है, जिनके मुख से अनुपम और शुद्ध वाणी प्रकट होती रहती है। [1]
कोई कहता है कि मुझे सदा माता काली का सहारा है, जो भक्तों की इच्छाओं को पूरा करती हैं और दुष्टों का नाश करती हैं। [2]
कोई कहता है कि मुझे सदा गंगा जी का बल है, जिनकी पूजा-अर्चना और भोग समर्पित करने से सभी पाप मिट जाते हैं। [3]
श्री लाल बलबीर जी कहते हैं, "मुझे तो सदा एक मात्र वृंदावन विहारिणी, श्री राधा महारानी का ही भरोसा है।" [4]

