प्राणन वारौं चरण रज, व्रज के प्रीतम प्यारी।
रसिकन के हित गति अनूप, अन सब फलों ते न्यारी॥
- ब्रज के दोहे
मैं अपने प्राणों को ब्रज के प्रीतम प्यारी (श्री राधा कृष्ण) के चरणों की रज पर समर्पित करता हूँ, जो रसिकों की परम गति हैं एवं अन्य सभी फलों से न्यारे हैं।

