धन धन वृन्दावन के स्वान प्यारे - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (77)

धन धन वृन्दावन के स्वान प्यारे - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (77)

धन धन वृन्दावन के स्वान प्यारे। 
गैल घाट में सोय रहत हैं, चोरन के रखवारे॥ [1]
साधु सन्त की पातर चाटैं, महाप्रसाद के पारे। 
अभयराम ये हू बड़भागी, रज में रहैं बिचारे॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (77)

श्री वृन्दावन के श्वान (कुत्ते) धन्य धन्य हैं, जो यमुना घाटों और गलियों में सोते हैं और चोरों से रक्षा करते हैं। [1]

ये साधु-संतों के जूठे पत्तल चाटते हैं, जो महाप्रसाद कहलाता है। श्री अभयराम जी कहते हैं, "वृन्दावन के स्वान अत्यंत सौभाग्यशाली हैं, जो सदा रज में लोटते रहते हैं।" [2]