ललितमाधुरी लाल कब चरनन विसमृत परों - श्री ललित माधुरी

ललितमाधुरी लाल कब चरनन विसमृत परों - श्री ललित माधुरी

ललितमाधुरी लाल, कब चरनन विसमृत परों।
पगनख चंद्र रसाल, दृगन चकोरिन लिखिअरों॥

- श्री ललित माधुरी

हे युगल सरकार, श्री श्यामा-श्याम! कब मैं सब कुछ भुलाकर आपके चरणों में विश्राम करूँगा? कब मेरी चकोर जैसी आँखें आपके मनमोहक एवं रसाल नखचन्द्रों पर स्थिर होंगी?