‘रा’ कहे भव भीर घटै अरु - श्री प्रियादास

‘रा’ कहे भव भीर घटै अरु - श्री प्रियादास

(सवैया)
‘रा’ कहे भव भीर घटै अरु,
पीर मिटै जग होय अबाधा। [1]
‘धा’ के कढ़े मुख ते धन धर्म बढै,
हरि भक्ति पूजै मन साधा॥ [2]
शास्त्र पुरान कौ भेद लख्यो नहीं,
राधिका नाम कौ अर्थ अगाधा। [3]
‘प्रियादास’ करी हरि ने आराधन,
नाम परयौ ताते श्री राधा॥ [4]

- श्री प्रियादास

“रा” का उच्चारण करने से संसार का भय कम हो जाता है और समस्त कष्ट एवं बाधाएँ स्वतः ही दूर हो जाती हैं। [1]

“धा” का उच्चारण करने से धन और धर्म की वृद्धि होती है तथा मन श्रीहरि की सर्वोत्तम आराधना में मग्न हो जाता है। [2]

शास्त्र एवं पुराण भी “राधिका” नाम के अगाध और गूढ़ अर्थ को पूरी तरह समझने में असमर्थ हैं। [3]

श्री प्रिया दास कहते हैं कि भगवान हरि ने स्वयं श्री राधिका की आराधना की है और इसी कारण वे “श्री राधा” नाम से विख्यात हुईं। [4]