हम जानत तीरथ बड़े तीरथ हरि की आस - श्री मलूक दास

हम जानत तीरथ बड़े तीरथ हरि की आस - श्री मलूक दास

हम जानत तीरथ बड़े, तीरथ हरि की आस।
जिनके हिरदे हरि बसै, कोटि तिरथ तिन पास॥

- श्री मलूक दास

श्री मलूक दास जी कहते हैं कि मैंने तीर्थों के बारे में बहुत सुना है और यह भी जानता हूँ कि उनका बहुत महत्व है । परंतु जो भक्त मन लगाकर भगवान का भजन करते हैं, उनके हृदय में तो स्वयं करोड़ों तीर्थ बसते हैं।