तेनापि सहसा प्रोक्तं तत्र वासेऽतिदुष्करः।
ये दोषदर्शिनो धाम्नि वासादपि पतन्ति ते॥
- श्री वागीश शास्त्री जी, श्रीराधासप्तशती (1.21)
श्री वृंदावन में वास करना बहुत कठिन कार्य है क्योंकि धाम में रहने पर जो धाम अथवा धाम वासियों में दोष देखने लगते हैं वे पतित हो जाते हैं।
ये दोषदर्शिनो धाम्नि वासादपि पतन्ति ते॥
- श्री वागीश शास्त्री जी, श्रीराधासप्तशती (1.21)
श्री वृंदावन में वास करना बहुत कठिन कार्य है क्योंकि धाम में रहने पर जो धाम अथवा धाम वासियों में दोष देखने लगते हैं वे पतित हो जाते हैं।

