अपनी ओर निहारि के कृपा दृष्टि जो होय - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (13)

अपनी ओर निहारि के कृपा दृष्टि जो होय - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (13)

अपनी ओर निहारि के, कृपा दृष्टि जो होय ।
तो प्यारी वनि है भले, साधन और न कोय ॥

- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (13)

हे परम करुणामयी प्यारी जू (श्री राधा)! यदि आप अपनी कृपामयी दृष्टि मेरी ओर डाल देंगीं तो मेरी अनंत जन्मों की बिगड़ी बन जाएगी । इसके अतिरिक्त मेरे पास अन्य कोई साधन नहीं है ।