अहो सहो नहिं जात अब, बहुत भई नन्दनंद।
करूना करि करुनायतन, राखहु जन ‘हरिचंद’ ॥
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (31)
हे नंदनंदन (श्रीकृष्ण)! अब बहुत हुई, अब आपके दर्शन के बिना जीना असंभव है । श्री हरिचंद प्रार्थना कर रहे हैं कि हे परम करुणामय, अब मुझ पर कृपा कीजिए और अपने सेवक की रक्षा कीजिए।
करूना करि करुनायतन, राखहु जन ‘हरिचंद’ ॥
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (31)
हे नंदनंदन (श्रीकृष्ण)! अब बहुत हुई, अब आपके दर्शन के बिना जीना असंभव है । श्री हरिचंद प्रार्थना कर रहे हैं कि हे परम करुणामय, अब मुझ पर कृपा कीजिए और अपने सेवक की रक्षा कीजिए।

