(राग मालकोश, त्रिताल)
हमारी प्रिया छबीली राधा।
जाकी छवि सुमिरत अरु निरखत, दूर होय सब बाधा॥ [1]
वनरानी सुंदर अति प्यारी, ब्रज रसिकन सब साधा।
श्रीगोपालहित हरी स्वामिनी, महिमा अमित अगाधा॥ [2]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (99)
हमारी प्रिया श्री राधा अत्यंत छबीली और मनमोहिनी हैं, जिनकी छवि का स्मरण करने और दर्शन करने मात्र से सभी प्रकार की बाधाएँ स्वतः ही दूर हो जाती हैं। [1]
वे वृंदावन की सुंदर रानी हैं, जो अत्यंत प्यारी और मनोहर हैं, जिनका भजन समस्त ब्रज के रसिकजन प्रेमपूर्वक करते हैं। श्री हित गोपाल दास जी कहते हैं कि श्री राधा श्री हरि की भी स्वामिनी हैं, जिनकी महिमा असीम और अगाध है। [2]
हमारी प्रिया छबीली राधा।
जाकी छवि सुमिरत अरु निरखत, दूर होय सब बाधा॥ [1]
वनरानी सुंदर अति प्यारी, ब्रज रसिकन सब साधा।
श्रीगोपालहित हरी स्वामिनी, महिमा अमित अगाधा॥ [2]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (99)
हमारी प्रिया श्री राधा अत्यंत छबीली और मनमोहिनी हैं, जिनकी छवि का स्मरण करने और दर्शन करने मात्र से सभी प्रकार की बाधाएँ स्वतः ही दूर हो जाती हैं। [1]
वे वृंदावन की सुंदर रानी हैं, जो अत्यंत प्यारी और मनोहर हैं, जिनका भजन समस्त ब्रज के रसिकजन प्रेमपूर्वक करते हैं। श्री हित गोपाल दास जी कहते हैं कि श्री राधा श्री हरि की भी स्वामिनी हैं, जिनकी महिमा असीम और अगाध है। [2]

![हमारी प्रिया छबीली राधा - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (99)](https://images.brajrasik.org/6762510c8167e20003a06df5-m.jpeg)