अत्रैव व्रजभूमिः सा यत्र तत्त्वं सुगोपितम् - स्कंद पुराण, मथुरा माहात्म्यम् (2.6.1.28)

अत्रैव व्रजभूमिः सा यत्र तत्त्वं सुगोपितम् - स्कंद पुराण, मथुरा माहात्म्यम् (2.6.1.28)

यत्र भूरादयो लोका भुवि माथुरमण्डलम् ॥
अत्रैव व्रजभूमिः सा यत्र तत्त्वं सुगोपितम् ।
भासते प्रेमपूर्णानां कदाचिदपि सर्वतः ॥

- स्कंद पुराण, मथुरा माहात्म्यम् (2.6.1.28)

भू आदि लोकों में मथुरा मंडल की वही ब्रजभूमि है, जहाँ वह परम गुप्त तत्व स्थित है। भगवान की कृपा से, कदाचित जिस व्यक्ति के हृदय में पूर्ण प्रेम का आविर्भाव हो जाता है, उसी को वह तत्व स्पष्ट रूप से भासित होता है।