निसबासर तिथि मास रितु - श्री भगवत रसिक की वाणी, श्री नित्यविहारी जुगल ध्यान (6)

निसबासर तिथि मास रितु - श्री भगवत रसिक की वाणी, श्री नित्यविहारी जुगल ध्यान (6)

निसबासर, तिथि-मास-रितु, जे जग के त्यौहार ।
ते सब देखौ भाव में, छाँड़ि जगत ब्योहार॥

- श्री भगवत रसिक जी, भगवत रसिक की वाणी, श्री नित्यविहारी जुगल ध्यान (10)

उत्सव त्यौहारों से संबंधित समस्त सांसारिक व्यवहारों को त्यागकर नित्य निकुंज मंदिर के दिन रात, तिथि मास ऋतु और समस्त उत्सवों को भाव में ही देखना चाहिए ।