श्रीराधे त्वपदाम्भोज पराग-परिरञ्जिते।
वृन्दारण्ये रसमये देहि मे निश्चला रतिम्॥
- श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (47)
हे श्रीराधे! आपके चरण-कमल-पराग से पूर्णतया अनुरंजित रसमय श्रीवृन्दावन के प्रति मुझे अचला प्रीति प्रदान कीजिए।
वृन्दारण्ये रसमये देहि मे निश्चला रतिम्॥
- श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (47)
हे श्रीराधे! आपके चरण-कमल-पराग से पूर्णतया अनुरंजित रसमय श्रीवृन्दावन के प्रति मुझे अचला प्रीति प्रदान कीजिए।

