श्रीमुख बानी कही विलँब अब नैंकु न लावहु - श्री सूरदास, सूर सागर

श्रीमुख बानी कही विलँब अब नैंकु न लावहु - श्री सूरदास, सूर सागर

श्रीमुख बानी कही, विलँब अब नैंकु न लावहु।
व्रज परिक्रमा करहु, देह कौ पाप नसावहु॥

- श्री सूरदास, सूर सागर

जब ब्रह्मा जी क्षमा याचना कर रहे थे, तब श्री कृष्ण बोले - "अब जरा भी विलंब न करो। ब्रज की परिक्रमा करके अपने देह के पापों को नष्ट करो"।