तलहटी बरसाने की रहिये।
गहवर वन की बैठ लतन में, राधा-राधा गइये॥ [1]
सदा सर्वदा पर्वत ऊपर, नित प्रति चढ़ कर जइये।
‘नागरिदास’ वास बरसाने, कुँवरी दिये सौं पाइये॥ [2]
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह), श्री नागरीदास जी की वाणी
बरसाने की तलहटी (नीचे के हिस्से) में निवास करें। गहवर वन की लताओं में बैठकर "राधा-राधा" गान करें। [1]
सदा-सर्वदा, बरसाने पर्वत के ऊपर चढ़कर जाएं और श्री राधारानी के दर्शन करें । श्री नागरीदास जी कहते हैं कि बरसाना वास तो केवल श्री किशोरीजी की कृपा से ही मिलता है । [2]
गहवर वन की बैठ लतन में, राधा-राधा गइये॥ [1]
सदा सर्वदा पर्वत ऊपर, नित प्रति चढ़ कर जइये।
‘नागरिदास’ वास बरसाने, कुँवरी दिये सौं पाइये॥ [2]
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह), श्री नागरीदास जी की वाणी
बरसाने की तलहटी (नीचे के हिस्से) में निवास करें। गहवर वन की लताओं में बैठकर "राधा-राधा" गान करें। [1]
सदा-सर्वदा, बरसाने पर्वत के ऊपर चढ़कर जाएं और श्री राधारानी के दर्शन करें । श्री नागरीदास जी कहते हैं कि बरसाना वास तो केवल श्री किशोरीजी की कृपा से ही मिलता है । [2]

