नमस्त्रैलोक्यजननि प्रसीद करुणार्णवे ।
ब्रह्मविष्ण्वादिभिर्देवैर्वन्द्यमानपदाम्बुजे ॥
- देवी भागवत (9.50.47) [श्री राधा नमस्कार स्तोत्रम् (2)]
भगवान नारायण कहते हैं - हे करुणा की सागर, श्री राधा! तुम त्रिलोक की जननी हो, मैं तुम्हें नमस्कार करता हूँ । तुम मुझपर प्रसन्न होने की कृपा करो । ब्रह्मा, विष्णु आदि समस्त देवता तुम्हारे चरण कमलों की उपासना करते हैं ।
ब्रह्मविष्ण्वादिभिर्देवैर्वन्द्यमानपदाम्बुजे ॥
- देवी भागवत (9.50.47) [श्री राधा नमस्कार स्तोत्रम् (2)]
भगवान नारायण कहते हैं - हे करुणा की सागर, श्री राधा! तुम त्रिलोक की जननी हो, मैं तुम्हें नमस्कार करता हूँ । तुम मुझपर प्रसन्न होने की कृपा करो । ब्रह्मा, विष्णु आदि समस्त देवता तुम्हारे चरण कमलों की उपासना करते हैं ।

