मनमोहन बसकारिनी, नखसिख रूप रसाल।
सो स्वामिनि नित गाइये, रसिकनि राधा बाल ॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, उत्साह सुख (23)
उन स्वामिनी जी, रसकिनी श्रीराधा के गुणों का नित्य गान कीजिए, जो श्री कृष्ण को वश करने वाली हैं और जिन का नख से शिख पर्यन्त रूप रस से भरा हुआ है।
सो स्वामिनि नित गाइये, रसिकनि राधा बाल ॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, उत्साह सुख (23)
उन स्वामिनी जी, रसकिनी श्रीराधा के गुणों का नित्य गान कीजिए, जो श्री कृष्ण को वश करने वाली हैं और जिन का नख से शिख पर्यन्त रूप रस से भरा हुआ है।

