लडैती जू तेरी रङ्ग भरी मुसिक्यानि।
तन मन अति आनंद बढावति, अद्भुत सुख की खानि॥ [1]
परम प्रवीन किसोरी राधे, अति जाननिमनि जानि।
श्रीरसिक सिरोमनि की निजु जीवनि, कुंजबिहारिनि रानि॥ [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के पद (10)
हे लड़ैती जू (श्री राधा), आपकी मुस्कान प्रेम रंग से भरी है, जो सुख की अद्भुत खान है एवं तन-मन में आनंद को बढ़ाने वाली है। [1]
परम प्रवीण किशोरी राधे सबके मन की भली प्रकार से जानने वाली हैं। श्री ललितकिशोरी देव जी कहते हैं कि “मेरी कुँजबिहारिणी महारानी, रसिक शिरोमणि श्री लाल जी की जीवन प्राण हैं।" [2]

