केचिद्भजन्ति कृतिनो गिरिजामथान्ये - श्री केशवाचार्य, गोवर्द्धन शतक (53)

केचिद्भजन्ति कृतिनो गिरिजामथान्ये - श्री केशवाचार्य, गोवर्द्धन शतक (53)

केचिद्भजन्ति कृतिनो गिरिजामथान्ये
सेवन्ति भर्गमपरे दिवसाधिनाथं।
एके गणाधिप सुराधिप शंकरादीन्
सेवन्त्वहं गिरिवरं शरणं ब्रजामि॥

- श्री केशवाचार्य, गोवर्द्धन शतक (53)

कोई कुशल जन गिरिजा (पार्वती) जी की आराधना करते हैं, कोई शिवजी की तथा कोई सूर्य-भगवान की सेवा करते हैं। कोई वह हैं जो गणेश जी की, कोई इंद्र की तथा कोई शंकर जी आदि देवताओं की आराधना करते हैं, अस्तु, जो करते हैं किया करें, मैं तो श्री गोवर्धन जी की शरण में ही जाता हूँ।