तनक हँसि चितबौ हमारी ओर - श्री कृष्ण प्रिया जी

तनक हँसि चितबौ हमारी ओर - श्री कृष्ण प्रिया जी

तनक हँसि चितबौ हमरी ओर।
मेरो तो मोहन इक तुम्हीं, तुमकौं लाख करोर॥ [1]
कबकी मैं ठाड़ी अरज करत हौं, सुनियो नंदकिशोर।
‘कृष्णप्रिया’ के प्रान जीवनधन, करुनानिधि चितचोर॥ [2]

- श्री कृष्ण प्रिया जी
 
हे श्यामसुंदर! तनिक मुझ पर भी हँसकर अपनी दृष्टि डालो। तुम्हारे तो असंख्य जीव हैं, पर मेरे तो केवल तुम ही हो, हे मनमोहन! [1]

मैं कब से खड़ी होकर विनती कर रही हूँ, लेकिन हे नंदकिशोर, अब तो कृपा कर उसे सुन लो! श्रीकृष्णप्रिया जी कहती हैं कि उनके प्राण, जीवन-धन, करुणानिधि, चितचोर श्रीकृष्णचंद्र ही हैं। [2]