कह देता झट जीभ से, रट तू राधे श्याम ।
स्वयं कहीं आता निकल, मन तू बड़ा हराम ॥
- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, श्याम शतक (42)
हे मन, तू जीभ से तो तुरंत “राधे श्याम” का जाप करने को कह देता है, परंतु तू स्वयं बड़ा मक्कार है और कहीं और भटकता रहता है।
स्वयं कहीं आता निकल, मन तू बड़ा हराम ॥
- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, श्याम शतक (42)
हे मन, तू जीभ से तो तुरंत “राधे श्याम” का जाप करने को कह देता है, परंतु तू स्वयं बड़ा मक्कार है और कहीं और भटकता रहता है।

