राख्यौ कहत न मैं कछू, तोकों सर्वसु सार ।
श्रीकुंजबिहारिनि कौ भजन, जीवन अहार बिहार ॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (220)
सर्वोपरि नित्य बिहारिनी जू (श्री राधा) का महामधुर रसमय विहार ही हमारे जीवन के प्राणों का आहार (सर्वस्व) है। परमार्थ के सारों का सार यही विहार है, जिसे हमने तुमसे भली-भाँति कह दिया है, और इसमें कुछ भी छिपाया नहीं है।
श्रीकुंजबिहारिनि कौ भजन, जीवन अहार बिहार ॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (220)
सर्वोपरि नित्य बिहारिनी जू (श्री राधा) का महामधुर रसमय विहार ही हमारे जीवन के प्राणों का आहार (सर्वस्व) है। परमार्थ के सारों का सार यही विहार है, जिसे हमने तुमसे भली-भाँति कह दिया है, और इसमें कुछ भी छिपाया नहीं है।

