(श्री) राधावल्लभकौ हौ भांवतौ चेरौ।
राधावल्लभ कहत सुनतही, मन न नैम जम केरौ॥ [1]
राधावल्लभ वस्तु भूलि हूँ, कियौ अनत नहिं फेरौ।
राधावल्लभ व्यासदासकै सुनहुँ श्रवन दै टेरौ॥ [2]
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (133)
मैं श्री राधावल्लभ जी का चहेता दास हूँ। श्री राधावल्लभ का नाम श्रवण एवं उच्चारण करने मात्र से मेरे मन में यम, नियम, आदि नहीं ठहरता। [1]
श्री राधावल्लभ जी को छोड़कर मैं भूल से भी कहीं और नहीं जाऊँगा। श्री हरिराम व्यास कहते हैं "हे श्री राधावल्लभ, इस दास की पुकार सुनिए।" [2]

