वृन्दावन की रजनी में, सोवत पाँइ पसारि।
और ठौर के भजन गन, लजत होत बलिहारि॥
- श्री अनन्य अली, श्री अनन्य अली जी की वाणी, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.53)
वृंदावन की परम पावन भूमि पर, श्री राधा महारानी की शरण में पाँव पसार कर सोना भी अति श्रेष्ठ भजन है। अन्य स्थानों के कितने ही उत्तम भजन और साधन भी, इसके सम्मुख लज्जित होकर नतमस्तक हो जाते हैं।
और ठौर के भजन गन, लजत होत बलिहारि॥
- श्री अनन्य अली, श्री अनन्य अली जी की वाणी, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.53)
वृंदावन की परम पावन भूमि पर, श्री राधा महारानी की शरण में पाँव पसार कर सोना भी अति श्रेष्ठ भजन है। अन्य स्थानों के कितने ही उत्तम भजन और साधन भी, इसके सम्मुख लज्जित होकर नतमस्तक हो जाते हैं।

