दसन खँडित वीरी रुचिर, दैहैं निकट बुलाय।
कुंवरि आपने कंठ को, हार कंठ पहराय॥
- श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (149)
मेरी यही अभिलाषा है कि कुंवरी श्री राधा अपने सुकोमल हाथों से उनके द्वारा चर्वित पान मुझे अपने निकट बुलाकर प्रदान करेंगी एवं अपने कंठ के हार को मेरे कंठ में पहनाएंगी।
कुंवरि आपने कंठ को, हार कंठ पहराय॥
- श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (149)
मेरी यही अभिलाषा है कि कुंवरी श्री राधा अपने सुकोमल हाथों से उनके द्वारा चर्वित पान मुझे अपने निकट बुलाकर प्रदान करेंगी एवं अपने कंठ के हार को मेरे कंठ में पहनाएंगी।

