बन्दौं स्वमिनि चरण तिहारे - श्री श्यामदास

बन्दौं स्वमिनि चरण तिहारे - श्री श्यामदास

बन्दौं स्वमिनि चरण तिहारे।
अरुणकमल मृदु अमल करुण अति, रतिपति मनहि लुभावनवारे॥ [1]
सुन्दर सरस सुचारु सुगन्धित, नखमणिचन्द्र अमन्द उजारे।
चन्दन चर्चित नूपुर - नादित, ब्रह्मानन्द भुलावन हारे॥ [2]
सखिजन सेवित, लालित-पालित, अष्टयाम घनश्यामहिं प्यारे।
'श्यामदास' के इष्ट शिरोमणि, तीन लोक वेदन ते न्यारे॥ [3]
- श्री श्यामदास

हे स्वामिनी श्री राधा, मैं आपके चरणकमलों की वंदना करता हूँ। आपके चरणारविंद अरुणवर्ण के, सुकोमल, निर्मल और करुणापूरित हैं, जो कामदेव के मन को भी लुभाने वाले हैं। [1]

ये अति सुंदर, सरस, और दिव्य सुगंध से युक्त हैं, जिनकी नखमणियों की उज्ज्वलता चंद्रमा को भी फीका कर देती है। जिन पर चंदन का लेप है, और जो नूपुरों की मधुर ध्वनि से गूंजित रहते हैं, ये ब्रह्मानंद को भी भुलाने वाले हैं। [2]

ये दिव्य चरणकमल सखियों द्वारा सेवित और लालित-पालित हैं, जो आठों याम श्रीकृष्ण को अति प्रिय हैं। श्री श्यामदास कहते हैं, “श्री राधा के चरणकमल ही मेरे इष्ट हैं, जो तीनों लोकों और वेदों से न्यारे हैं।” [3]