गाँठी सत्त कुपीन में, सदा फिरै निःसंक।
नाम अमल माता रहै, गिनै इन्द्र को रंक॥
- श्री मलूक दास
जिसकी लंगोटी में भले ही सात गाँठें लगी हों, परंतु जो सदा निडर होकर विचरता हो एवं श्री हरि के अमृत नाम रस में सदा लीन रहता हो, ऐसा महात्मा देवराज इन्द्र को भी रंक समझता है।
नाम अमल माता रहै, गिनै इन्द्र को रंक॥
- श्री मलूक दास
जिसकी लंगोटी में भले ही सात गाँठें लगी हों, परंतु जो सदा निडर होकर विचरता हो एवं श्री हरि के अमृत नाम रस में सदा लीन रहता हो, ऐसा महात्मा देवराज इन्द्र को भी रंक समझता है।

