आओ प्यारे हृदयसदन में - श्री युगल प्रिया

आओ प्यारे हृदयसदन में - श्री युगल प्रिया

(राग पीलू-ताल कहरवा)
आओ प्यारे हृदयसदन में,
पल कपाट दै राखूँगी। [1]
जान लिये छल-छंद-फंद सब
अब न चलै सत्य भाखूँगी॥ [2]
करिहै जो कोई विघन मिलनमें
ताके सब कल-बल नाखूँगी। [3]
जुगलप्रिया मनमोहन तुम्हरौ,
द्रगभरि रूपसुधा चाखूँगी॥ [4]
- श्री युगल प्रिया

हे प्यारे कृष्ण, मेरे ह्रदय मंदिर में आओ, मैं तुम्हें सदा उसमें बसा के रखूँगी। [1]

हे छलिया, मैंने तुम्हारे समस्त छल-कपट को भलीभाँति समझ लिया है। अब मैं सत्य कहती हूँ कि इनका मुझ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। [2]

मेरे और तुम्हारे मिलन में जो भी विघ्न आएगा, उसे मैं बलपूर्वक अवश्य पार कर लूँगी। [3]

श्री युगलप्रिया  कहती हैं कि "हे मनमोहन श्री कृष्ण, तुम्हारी रूपसुधा का मैं अपने नेत्रों से भर-भर के पान करुँगी।" [4]