श्रीगुरु सन्धि सुभाव न पावत - श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जी की वाणी, साखी (11)

श्रीगुरु सन्धि सुभाव न पावत - श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जी की वाणी, साखी (11)

श्रीगुरु सन्धि सुभाव न पावत, गावत जग जस धूता ।
बिना अनन्य विहारै चाहत, क्यों पावहुगे पूता ॥

- श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जी की वाणी, साखी (11)

सर्वोपरि नित्य विहार के दाता स्वामी श्री हरिदास जी महाराज के सिद्धांत एवं स्वभाव की संधि न प्राप्त होने के कारण, धूर्त लोग केवल संसार के यश को ही गाते हैं । बिना दृढ़ अनन्य उपासना किए नित्य विहार को कोई कैसे प्राप्त कर सकता है?