आरती भानु दुलारी की, कि श्री बरसाने वारी की।
विराजें सिंहासन श्यामा, दिव्य श्री वृन्दावन धामा,
ढुरावैं चँवर सुघर बामा, पलोटैं पग पूरन कामा।
लली पग अंक चापि नि:शंक, श्याम जनु रंक,
पाय निधि पारस प्यारी की, कि श्री बरसाने वारी की॥ आरती ॥ [1]
मैं बृषभानु की लाड़िली पुत्री, बरसाने वारी राधे की आरती करता हूँ।
मैं बृषभानु की लाड़िली पुत्री, बरसाने वारी राधे की आरती करता हूँ।
राधा रानी दिव्य धाम वृंदावन में रत्न जड़ित स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान हैं।
सुंदर सखियाँ चंवर से उन्हें धीरे-धीरे पंखा झल रही हैं,
और पूर्णकाम ब्रह्म श्री कृष्ण उनके चरण कमलों को दबा रहे हैं।
उनके चरणों को अपनी गोद में लेकर, उन्हें बड़े ध्यान से दबाते हुए, कृष्ण स्वयं को उस भाग्यशाली रंक के समान समझते हैं
जो पारस मणि पाकर अत्यधिक प्रसन्नता से रोमांचित है।
मैं बृषभानु की लाड़िली पुत्री, बरसाने वारी राधे की आरती करता हूँ। [1]
गौर सिर कनक मुकुट राजैं, चन्द्रिका चारु सुछबि छाजैं,
कुटिल कुन्तल अलि भल भ्राजैं, लखत जेहि शिखिकलाप लाजैं।
माँग सिन्दूर, मोतियन पूर, सजीवनि मूर,
ब्रह्म गोवर्धन धारी की, कि श्री बरसाने वारी की॥ आरती ॥ [2]
राधा रानी के सिर पर रत्न जड़ित स्वर्ण मुकुट सुशोभित है,
राधा रानी के सिर पर रत्न जड़ित स्वर्ण मुकुट सुशोभित है,
सुंदर चंद्रिका अपनी शोभा बिखेर रही है,
और किशोरी जी के काले और घुंघराले बालों की मनमोहक सुंदरता,
श्री कृष्ण के मोर मुकुट की शोभा को भी फीका कर रही है।
उनकी मांग में 'सिंदूर' और सुन्दर मोतियां सुशोभित हैं ।
श्री किशोरीजी ब्रह्म गोवर्धनधारी श्री कृष्ण की संजीवनी मूरी हैं ।
मैं बृषभानु की लाड़िली पुत्री, बरसाने वारी राधे की आरती करता हूँ। [2]
श्रवण विच करण फूल झलकैं, नासिका विच बेसर हलकैं,
नयन विच प्रेमसुधा छलकैं, बन्धु बल के लखि लखि ललकैं।
चपल नथ चमक, दसनदुति दमक, सुमुखिमुख रमक,
मधुर मुसकिन सुकुमारी की, कि श्री बरसाने वारी की॥ आरती ॥ [3]
उनके कानों में सुन्दर कुण्डल चमक रहे हैं,
उनके कानों में सुन्दर कुण्डल चमक रहे हैं,
उनके नासिका के मोती का हिलना सुंदर है,
उनकी आँखों में दिव्य प्रेम उमड़ रहा है,
और बलराम के भाई श्री कृष्ण उनके
मोहक रूप की प्रेममयता की प्रशंसा कर रहे हैं।
नासिका की चमकदार नथ चपलता धारण किये हुए हैं और उनके दाँत देदीप्यमान हो रहे हैं। उनका मुखकमल उनकी सुकुमार सौंदर्य की अधिकता से चमक रहा है,
और वे प्रेमपूर्वक मुस्कुरा रही हैं।
मैं बृषभानु की लाड़िली पुत्री, बरसाने वारी राधे की आरती करता हूँ। [3]
मोतियन लर उरमणिमाला, चिबुक झलकत इक तिल काला,
शम्भु शुक दैं संग करताला, लली गुण गावति ब्रजबाला।
कबहुँ मुख मुरनि, कबहुँ दृग दुरनि, कबहुँ दृग जुरनि,
कबहुँ सुधि भुरनि विहारी की, कि श्री बरसाने वारी की॥ आरती ॥ [4]
उनके गले में चमकते मोतियों और अमूल्य रत्नों की मालाएँ हैं,
उनके गले में चमकते मोतियों और अमूल्य रत्नों की मालाएँ हैं,
और उनकी ठोड़ी पर एक झिलमिलाता हुआ छोटा सा काला तिल है।
भगवान शिव, शुकदेव आदि ताली बजा रहे हैं,
और ब्रज की गोपियाँ उनकी महिमा के गीत गा रही हैं।
कभी वे अपना मुख मोड़कर गोपियों (जो पास में खड़ी हैं) की ओर देखती हैं।
कभी वे दूर गोपियों (जो पीछे खड़ी हैं) की ओर देखती हैं,
और कभी (उनकी अधीरता देखकर) वे कृष्ण की आँखों में देखती हैं,
जिससे वे उनके प्रेम में अपनी चेतना खो देते हैं।
मैं बृषभानु की लाड़िली पुत्री, बरसाने वारी राधे की आरती करता हूँ। [4]
किनारिन जरिन नील सारी, कंचुकी कुमकुम रंग वारी,
चुरी कर कंकन मनहारी, छीन कटि किंकिनी छवि न्यारी।
पायलनि पगनि, महावरि लगनि, बीछुवनि नगनि,
'कृपालु' सुकीर्ति - कुमारी की, कि श्री बरसाने वारी की॥ आरती ॥ [5]
उन पर सोने की किनारी वाली प्यारी नीली साड़ी शोभायमान है,
उन पर सोने की किनारी वाली प्यारी नीली साड़ी शोभायमान है,
उनके शरीर पर गुलाबी कंचुकी मनहरण है,
उनके करकमलों में सुन्दर कंगन और चूड़ियों की शोभा मनमोहक है।
और उनकी पतली कमर पर अलंकृत कमरबंद की सुंदरता मन को मोह लेने वाली है।
उन्होंने पायल धारण किया है, उनके चरण कमलों में महावर लगे हुए हैं और उनके चरणों की उंगलियों में सुंदर छोटी-छोटी नाजुक हीरे की अंगूठियाँ जड़ी हुई हैं।
इस प्रकार सुन्दर वस्त्राभूषणों से सुसज्जित कीर्ति कुमारी राधे (स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान हैं और गोपियाँ उनकी आरती कर रही हैं)।
मैं बृषभानु की लाड़िली पुत्री, बरसाने वारी राधे की आरती करता हूँ। [5]

