(श्री) राधावल्लभ परम धन, व्यासहि फबि गई लूट।
खरचत हूँ निघटैं नहीं, भरे भँडार अटूट॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (5)
श्री राधावल्लभ ही परम धन हैं, और व्यासजी ने हर्षित होकर इस अमूल्य संपदा को लूटा है। यह ऐसा दिव्य खजाना है कि चाहे जितना निरंतर निकालो, इसका भंडार सदा भरा हुआ ही रहता है।
खरचत हूँ निघटैं नहीं, भरे भँडार अटूट॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (5)
श्री राधावल्लभ ही परम धन हैं, और व्यासजी ने हर्षित होकर इस अमूल्य संपदा को लूटा है। यह ऐसा दिव्य खजाना है कि चाहे जितना निरंतर निकालो, इसका भंडार सदा भरा हुआ ही रहता है।

