निरख निरख शोभा हर्ष, पिय हिय होत अपार।
डरत डरत बिनती करत, जै श्री राजकुमार॥
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, मान लीला दोहावाली (93)
श्री राधा की अद्भुत रूप माधुरी को निहार कर श्री कृष्ण के हृदय को अपार आनंद होता है । तब माननी श्री राधा को मनाने के लिए वे अत्यंत विनम्र होकर, डरते-डरते श्री राधा से विनती करने लगते हैं। ऐसी सर्वोच्च स्वामिनी, वृंदावन की अधिष्ठात्री किशोरीजी की जय हो!
डरत डरत बिनती करत, जै श्री राजकुमार॥
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, मान लीला दोहावाली (93)
श्री राधा की अद्भुत रूप माधुरी को निहार कर श्री कृष्ण के हृदय को अपार आनंद होता है । तब माननी श्री राधा को मनाने के लिए वे अत्यंत विनम्र होकर, डरते-डरते श्री राधा से विनती करने लगते हैं। ऐसी सर्वोच्च स्वामिनी, वृंदावन की अधिष्ठात्री किशोरीजी की जय हो!

