आजु निकुंज महल में गावत - श्री इच्छा सखी जी

आजु निकुंज महल में गावत - श्री इच्छा सखी जी

आजु निकुंज महल में गावत, प्रियालाल दोउ रँगभीने। [1]
बाजे सब मिलि बजत मधुर गति, मोहैं अलाप कहैं सुर झीने॥ [2]
राग-रागिनी मूरति धरिकै, चकित भयै मानौं लिखि दीने। [3]
‘इच्छा सखी’ निरिख या छवि कौं, प्रान वारि न्यौछावर कीने॥ [4]

- श्री इच्छा सखी जी

आज, मनोहर कुंज महल में, श्री राधा और श्री कृष्ण प्रेम-रस में लीन होकर एक संग गान कर रहे हैं। [1]

सहचरियाँ मधुर गति से बाजे बजा रही हैं । प्रिया प्रियतम के सुंदर सुर एवं मनोहारी आलाप हृदय को मोहित कर रहे हैं। [2]

साक्षात राग और रागिनी इस दृश्य को देखकर स्तब्ध खड़े हैं, मानो स्वयं भाग्य ने इस अद्भुत क्षण को रचा हो। [3]