(राग बिलावल)
बिहारिन बिनती यह सुन लीजिये।
तुव मुख आनन्दकन्द चन्द्र की, मोहि चकोरी कीजिये॥ [1]
छिन-छिन छटा लखूँ छबिराशी, नैंन निरख नित जीजिये।
सरस माधुरी सुनो स्वामिनी, दर्शन की निधि दीजिये॥ [2]
- श्री सरस माधुरी
हे नित्य बिहारिनी श्री राधा! कृपा कर मेरी इस विनम्र प्रार्थना को सुन लीजिए। मुझ पर ऐसी अनुग्रह दृष्टि कीजिए कि मैं सदा चकोरी बनकर आपके चंद्रमा सदृश आनंदमय मुखकमल का दर्शन करती रहूँ। [1]
हर क्षण आपकी अनुपम, अद्वितीय छवि को निहारते हुए ही मेरा जीवन बीते। श्री सरस माधुरी जी कहते हैं “हे मेरी स्वामिनी! कृपा करके अपने दिव्य दर्शन रूपी निधि का वरदान प्रदान कीजिए।” [2]
बिहारिन बिनती यह सुन लीजिये।
तुव मुख आनन्दकन्द चन्द्र की, मोहि चकोरी कीजिये॥ [1]
छिन-छिन छटा लखूँ छबिराशी, नैंन निरख नित जीजिये।
सरस माधुरी सुनो स्वामिनी, दर्शन की निधि दीजिये॥ [2]
- श्री सरस माधुरी
हे नित्य बिहारिनी श्री राधा! कृपा कर मेरी इस विनम्र प्रार्थना को सुन लीजिए। मुझ पर ऐसी अनुग्रह दृष्टि कीजिए कि मैं सदा चकोरी बनकर आपके चंद्रमा सदृश आनंदमय मुखकमल का दर्शन करती रहूँ। [1]
हर क्षण आपकी अनुपम, अद्वितीय छवि को निहारते हुए ही मेरा जीवन बीते। श्री सरस माधुरी जी कहते हैं “हे मेरी स्वामिनी! कृपा करके अपने दिव्य दर्शन रूपी निधि का वरदान प्रदान कीजिए।” [2]

