मथुरां मथुरा-नाथो वासुदेवो जगाम ह ।
अन्तर्हिते नन्द-सुते श्रीमद्-वृन्दावने मुने॥
- सनत्कुमार संहिता (36.306)
भगवान शिव नारदजी से कहते हैं—हे ऋषिवर, वे भगवान, जो वासुदेव के पुत्र और मथुरा के राजा हैं, वे श्रीकृष्ण ही मथुरा में प्रस्थान करते हैं। परंतु जो नंद लाल (श्री कृष्ण) हैं, वे वृंदावन को कभी नहीं त्यागते । वे तो सदा वृंदावन की कुंजों में लीलामग्न होकर छिपे रहते हैं।
अन्तर्हिते नन्द-सुते श्रीमद्-वृन्दावने मुने॥
- सनत्कुमार संहिता (36.306)
भगवान शिव नारदजी से कहते हैं—हे ऋषिवर, वे भगवान, जो वासुदेव के पुत्र और मथुरा के राजा हैं, वे श्रीकृष्ण ही मथुरा में प्रस्थान करते हैं। परंतु जो नंद लाल (श्री कृष्ण) हैं, वे वृंदावन को कभी नहीं त्यागते । वे तो सदा वृंदावन की कुंजों में लीलामग्न होकर छिपे रहते हैं।

