जैसी एकता प्रिया की ऐसी करे न कोई- श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (108)

जैसी एकता प्रिया की ऐसी करे न कोई- श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (108)

जैसी एकता प्रिया की, ऐसी करे न कोई।
तन मन बचननि चित्त में, रोम रोम रही भोइ॥

- श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (108)

जैसी एकता (घनिष्ठता) श्री प्रिया जी (श्री राधा) प्रदान करती हैं, वैसी और कोई नहीं कर सकता। वे मेरे तन, मन, वचन, एवं चित्त में, रोम-रोम में समाई हुई हैं ।