शाक पात वा कंद फल, जो कछु मिलै अहार।
वृंदावन नहीं छोड़िये, सुस्थल युगल विहार॥
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (6)
जो भी भोजन प्राप्त हो, चाहे वह शाक, पत्र, कंद अथवा फल ही क्यों न हो, उसी में संतोष कर लेना चाहिए। परंतु श्री वृंदावन धाम को कभी भी नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि यह युगल विहार का सुंदर स्थल है । श्री धाम वृंदावन के वास की अद्भुत महिमा है।
वृंदावन नहीं छोड़िये, सुस्थल युगल विहार॥
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (6)
जो भी भोजन प्राप्त हो, चाहे वह शाक, पत्र, कंद अथवा फल ही क्यों न हो, उसी में संतोष कर लेना चाहिए। परंतु श्री वृंदावन धाम को कभी भी नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि यह युगल विहार का सुंदर स्थल है । श्री धाम वृंदावन के वास की अद्भुत महिमा है।

