भटकयौ बहु बिधि जग बिपिन, मिलयो न कहुँ विश्राम ।
अब आनंदित ह्वै रहयौ, पाइ चरन घनस्याम ॥
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (5)
मैं इस संसार रूपी जंगल में अनेक प्रकार से भटकता रहा, परंतु कहीं भी विश्राम और शांति नहीं मिली। जब से घनश्याम (श्री कृष्ण) के चरणकमलों की शरण प्राप्त हुई है, तभी से मुझे वास्तविक आनंद और शांति का सच्चा अनुभव हुआ है।
अब आनंदित ह्वै रहयौ, पाइ चरन घनस्याम ॥
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (5)
मैं इस संसार रूपी जंगल में अनेक प्रकार से भटकता रहा, परंतु कहीं भी विश्राम और शांति नहीं मिली। जब से घनश्याम (श्री कृष्ण) के चरणकमलों की शरण प्राप्त हुई है, तभी से मुझे वास्तविक आनंद और शांति का सच्चा अनुभव हुआ है।

